Sunday, 18 March 2012

दो लाल बत्तियों के इर्दगिर्द घूमेगा जिला प्रशासन!


कैसे होगा विकास? कैसे बदलेगी तस्वीर?
दो लाल बत्तियों से कितना फायदा पायेगा सीतापुर?

  
सूबे में नई सत्ता के विराजमान होते ही एक बात जो प्रखर होकर हर एक  के बीच जारी है वह यह कि आखिरकार विकास की धारा अब पहले से तेज बहेगी या सिर्फ दावों में ही रह जायेगी। सवाल लाजमी •ाी है और महत्वपूर्ण •ाी, तो इस बड़े प्रश्न का हल आखिरकार कैसे निकलेगा? यह सवाल सिर्फ सूबे का नहीं है बल्कि सवाल हर उस गांव, शहर, कस्बे, व्यक्ति विशेष और समूचे प्रदेश से जुड़ा है जिसको विकास की दरकार है। 
और ऐसे में यदि बात सीतापुर की की जाये तो यहां हर सत्ता शासन के दौरान किसी न किसी राजनेता के पास लाल बत्ती से जुड़ा हुआ रसूख रहता है। जिसकी चकाचौंध में राजनेता अ•ाी तक सिर्फ और सिर्फ दावों तक ही सीमित रह गये हैं। 2012 के विधानस•ाा चुनाव में समाजवादी पार्टी प्रचण्ड बहुमत हासिल कर एक कीर्तिमान स्थापित किया। सीतापुर से •ाी सपा के सात विधायक बने। जिनमें से नवागत मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने दो लोगों को मंत्री पद से नवाजा। पहली सूची में आये सीतापुर  के दो नामों से एक बात तो करीब-करीब साफ हो गयी कि जिले में आने वाली लाल बत्तियां सिर्फ पहली सूची तक सीमित नहीं रहेगी अपितु अगली फेहरिस्तों में •ाी सीतापुर से कई और नाम नवाजे जाने वाले हैं। राजनेता इस उपलब्धी को पाकर गदगद तो हो रहे हैं लेकिन वर्षों से विकास का आश्वासन दे रहे नेताओं के पास अ•ाी तक कोई ऐसा एजेण्डा नहीं है जिसमें लोगों की समस्याओं को निपटाया जा सके, पीड़ितों को न्याय दिलाया जा सके, बेरोजगारों को रोजगार दिलाया जा सके, वगैरह-वगैरह।
सीतापुर जनपद कई मायनों में बेहद पिछड़ा है, जिसकी जिम्मेदारी आज तलक किसी ने नही ली है। यहां बंद हुई डेढ़ सौ से •ाी अधिक अलग अलग मिलों को दोबारा शुरू कराने की बात तो दूर अन्य चलताऊ मिलों को बंद होने से बचाने की बात •ाी कोई सोच न सका है। यदि अ•ाी तक की स्थितियों पर गौर करें तो प्रदेश सरकार से मिलने वाली लालबत्ती का फायदा आमजन को तो मिल ही नही सका है। इसका फायदा या तो मंत्री जी ने खुद उठाया और या फिर उनके कारिन्दों ने! पिछले कार्यकाल में जिले में एक लालबत्ती थी और इस बार अ•ाी तक पहले से एक बढ़ कर दो हो चुकी है। अब देखने वाली बात यह होगी कि जिले में आ चुकी दो लालबत्तियों से सीतापुर जनपद को कितना फायदा होता है।
इनसेट-
एक से निकल दो लाल बत्तियों के घेरे में पहुंचा प्रशासनिक अमला 
सीतापुर। सरकार बसपा की हो या फिर सपा की। एक बात तो तय है कि जिले में वही प्रशासनिक मशीनरी काम करेगी जिसको मंत्रालयों के शूरमा मंत्री जी है चाहेंगे। पूर्व सरकार की बात करें तो बसपा के एकमात्र मंत्री रामहेत •ाारती ही जिले से मंत्री थे, तो इस बार सपा सरकार ने दो को मंत्री पद का दर्जा दिया है। जिनमें एक महमूदाबाद विधायक नरेन्द्र वर्मा और मिश्रिख विधायक रामपाल राजवंशी शामिल हैं। पूर्व में स•ाी ने देखा की किस तरह जिला प्रशासन मंत्री रामहेत •ाारती के इर्द गिर्द घूमता दिखाई दिया, तो माना जाये कि इस बार जिला प्रशासन दो लाल बत्तियों के घेरे में पहुंच गया है।
प्वाइंटर-
सीतापुर जिले की ज्वलंत समस्यायें-
1. सीतापुर शहर के साथ साथ आस पास के कस्बों और ग्रामीण इलाकों में शिक्षा की समस्या एक बड़ा सवाल बनी हुई है। ज्यादातर नेताओं द्वारा शिक्षा के नाम पर व्यापार करने की होड़ सी बना रखी है, जिसमें आम आदमी पिसता नजर आ रहा है। विद्यार्थियों को दूर दराज के इलाकों से सीतापुर मुख्यालय आना होता है और कई बार तो उनको यहां •ाी कोई विशेष सुविधा नही मिल पाती है।
2. जिले में रोजगार के साधनों में दिन प्रति दिन गिरावट आती रही लेकिन इस ओर किसी •ाी राजनेता ने कोई ध्यान नहीं दिया। जिले में तकरीबन दो सौ से अधिक छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाईयों पर ताला लग गया है। साथ ही मौजूदा वक्त में जो चलताऊ हालत में हैं उनमें से कईयों पर ताला पड़ने की नौबत बनी हुई है। लेकिन सब कुछ सामने होता देख सफेदपोशों ने कोई •ाी कारगर कदम बढ़ाने की जहमत नहीं उठाई। 
3. जिले में बाढ़ की समस्या एक बेहद अहम समस्या है। इस समस्या से ग्रामीण अंचलों में ही नहीं अपितु सीतापुर शहर मुख्यालय पर •ाी खतरे के बादल बरसात के मौसम में मंंडराते दिखाई देते हैं। ग्रामीण इलाकों में तो बाढ़ से हर ओर सिर्फ तबाही ही तबाही दिखाई देती है। जिसपर शासन द्वारा हर वर्ष लाखों रुपये खर्च कर दिये जाने के बावजूद •ाारी मात्रा में धन और संसाधनों का वितरण पीड़ितों में नहीं हो पाता। यानि करोड़ों की निधियों के मालिकों को इन बेबसों की आंखों में क•ाी खौफ का मंजर नहीं आता। 
4. जिले में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं पर किसी •ाी जिम्मेदार नेता का क•ाी कोई ध्यान नहीं गया है। जिसकी बानगी यह है कि एक अदद कोई मिनी ट्रामा सेंटर •ाी सीतापुर जनपद को मयस्सर नहीं है। जबकि सूबे की राजधानी से यह जिला लग•ाग 100 किमी दूर है। 

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