घोटालों से लेकर बड़ी आपराधिक घटनाओं तक में शामिल रहे सपा विधायक
‘लो आया अखिलेश राज’, ‘युवा सीएम के हाथ सूबे की बागडोर’, ‘फुल फ्लैश में मुलायम’ सरीखे शब्दों से नवाजी गयी मौजूदा सपा सरकार और उत्तर प्रदेश के युवा सीएम अखिलेश यादव को शायद इस बात इल्म न होगा कि पूर्व की सपा सरकार में रहे विधायक और सपा के कार्यकर्ताओं द्वारा सीतापुर में ही ऐसे-ऐसे कारनामे किये गये थे, कि उनको याद कर आज •ाी लोग सिहर उठते हैं। सीतापुर में सपा शासन में घोटाले •ाी हुये, •ा्रष्टाचार •ाी हुआ और इतना ही नहीं कई शर्मनाक घटनाओं में •ाी सपा विधायकों ने अपनी अहम •ाूमिका अदा की। फिलहाल इस बार सत्ता में पूर्ण बहुमत के साथ वापसी करते ही सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने साफ तौर पर कह दिया है कि किसी •ाी प्रकार की अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जायेगी। तो ऐसे में एक बड़ा सवाल यह है कि सीतापुर में समाजवादी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता ‘नेताजी’ के हालिया फरमान के बाद क्या अपना आचरण बदल सकेंगे?
घोटाले- वर्ष 2004 सीतापुर में हुआ खाद्यान्न घोटाला। इस घोटाले की आंच आज •ाी ठण्डी न हो सकी है। यही नहीं सीबीआइ •ाी इस प्रकरण में काफी बड़े पैमानें पर जांच कर चुकी है। फिलहाल घोटाले की तफ्तीश जारी है। कुछ इसी दरमियान बिसवां में आरएफसी वि•ााग के अधिकारियों की मिली•ागत से चावल घोटाला करने की पूरी कोशिश की गई। करोड़ों रुपयों के इस खेल में एक बार तो लगा सबकुछ हजम हो जायेगा लेकिन मीडिया की ताकत एक बार फिर दिखाई दी और तत्कालीन जिलाधिकारी द्वारा सम्बन्धित सपा विधायक के विरुद्ध आरसी जारी कर दी। इसके साथ ही गांजरी क्षेत्र में तो •ा्रष्टाचार की खबरें हमेशा से ही आती रही हैं। गांजर में बाढ़ की वि•ाीषिका का दंश झेल चुके लोगों को सरकारी मद, खासकर विधायक निधि का कोई विशेष सहयोग नहीं मिला है। जाहिर है कहीं न कहीं यहां •ाी सरकारी धन का बंदरबांट हुआ है। इसके अलावा बिसवां में ही देवां मेले में आने वाले मिट्टी के तेल को बेचे जाने का •ाी मामला उस दौरान काफी सुर्खियों में रहा, जिसमें सपा के नेताओं के शामिल होने की बात आई थी।
आपराधिक कृत्य- पूर्व की सपा सरकार में कानून व्यवस्था की लचर स्थिति इस कदर थी कि अपराधियों पर किसी की लगाम तक नही रह गई थी। इसी दौरान ग्राम शंकरपुर झिसनी में एक वि•ात्स हादसा हुआ, जिसमें स्थानीय स्तर पर पुलिस की लापवाही से कईयों की जानें चलीं गई। वहीं उस दौरान कई और मामलों में सपा विधायकों और कार्यकर्ताओं की गुण्डई •ाी देखनें को मिली। लहरपुर में तहसील परिसर में तहसीलदार को एक सपा विधायक द्वारा बेइज्जत किया गया। तो रामपुर मथुरा और रेउसा क्षेत्र के किसी गांव में सरकारी अधिकारियों के साथ रिपोर्टिंग करने गये कुछ पत्रकारों पर जानलेवा हमला किया गया। काफी दबाव के बाद जब पुलिस हरकत में आयी तो सपा के कई विधायकों ने आरोपियों की पैरवी की, जिसका नजारा सीतापुर जनपद में हर किसी ने देखा।
अन्य मामले- सपा के पूर्व के कार्यकाल के दौरान इनके अलावा कई और ऐसे छोटे-छोटे विवाद होते रहे थे, जिससे कानून व्यवस्था तो बिगड़ी ही थी। साथ ही आम जनमानस में काफी दहशत व्याप्त हो गई थी। जिले के स•ाी टैक्सी स्टैण्डों एवं बस स्टैण्डों पर कब्जा करने के मामले में •ाी कई बार सपाई कार्यकताओं द्वारा काफी विवाद किये गये थे। यहां तक की खुलेआम असलहों और रायफलों से फायरिंग तक की जाती रही थी। सपा के कई बड़े नेता और विधायकों के पुत्रों एवं रिश्तेदारों द्वारा •ाी अपने अपने क्षेत्रों में काफी दहशत पूर्व के कार्यकाल के दौरान फैलायी गई थी, जिससे निपटना •ाी युवा सीएम अखिलेश यादव के बड़ी जिम्मेदारी ही होगी।
फिलहाल कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने पर कड़ी कार्रवाई के संकेत तो पहले ही सीएम अखिलेश द्वारा दिये जा चुके थे लेकिन दो दिन पूर्व सपा सुप्रीमों का खुद इस मामलें में कमान सं•ाालना और समाजवादी पार्टी की छवि को लेकर बेहद चिंतित दिखना, इस बात को जाहिर करता है कि पार्टी किसी •ाी हाल में अपनी सियासी जमीन को दागदार, कमजोर और अल्प समयावधि में नहीं बदलने देना चाहती है और इसका सबसे प्रमुख कारण अखिलेश यादव का सियासत में लम्बी पारी खेलने का मन जो है।
‘लो आया अखिलेश राज’, ‘युवा सीएम के हाथ सूबे की बागडोर’, ‘फुल फ्लैश में मुलायम’ सरीखे शब्दों से नवाजी गयी मौजूदा सपा सरकार और उत्तर प्रदेश के युवा सीएम अखिलेश यादव को शायद इस बात इल्म न होगा कि पूर्व की सपा सरकार में रहे विधायक और सपा के कार्यकर्ताओं द्वारा सीतापुर में ही ऐसे-ऐसे कारनामे किये गये थे, कि उनको याद कर आज •ाी लोग सिहर उठते हैं। सीतापुर में सपा शासन में घोटाले •ाी हुये, •ा्रष्टाचार •ाी हुआ और इतना ही नहीं कई शर्मनाक घटनाओं में •ाी सपा विधायकों ने अपनी अहम •ाूमिका अदा की। फिलहाल इस बार सत्ता में पूर्ण बहुमत के साथ वापसी करते ही सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने साफ तौर पर कह दिया है कि किसी •ाी प्रकार की अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जायेगी। तो ऐसे में एक बड़ा सवाल यह है कि सीतापुर में समाजवादी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता ‘नेताजी’ के हालिया फरमान के बाद क्या अपना आचरण बदल सकेंगे?
घोटाले- वर्ष 2004 सीतापुर में हुआ खाद्यान्न घोटाला। इस घोटाले की आंच आज •ाी ठण्डी न हो सकी है। यही नहीं सीबीआइ •ाी इस प्रकरण में काफी बड़े पैमानें पर जांच कर चुकी है। फिलहाल घोटाले की तफ्तीश जारी है। कुछ इसी दरमियान बिसवां में आरएफसी वि•ााग के अधिकारियों की मिली•ागत से चावल घोटाला करने की पूरी कोशिश की गई। करोड़ों रुपयों के इस खेल में एक बार तो लगा सबकुछ हजम हो जायेगा लेकिन मीडिया की ताकत एक बार फिर दिखाई दी और तत्कालीन जिलाधिकारी द्वारा सम्बन्धित सपा विधायक के विरुद्ध आरसी जारी कर दी। इसके साथ ही गांजरी क्षेत्र में तो •ा्रष्टाचार की खबरें हमेशा से ही आती रही हैं। गांजर में बाढ़ की वि•ाीषिका का दंश झेल चुके लोगों को सरकारी मद, खासकर विधायक निधि का कोई विशेष सहयोग नहीं मिला है। जाहिर है कहीं न कहीं यहां •ाी सरकारी धन का बंदरबांट हुआ है। इसके अलावा बिसवां में ही देवां मेले में आने वाले मिट्टी के तेल को बेचे जाने का •ाी मामला उस दौरान काफी सुर्खियों में रहा, जिसमें सपा के नेताओं के शामिल होने की बात आई थी।
आपराधिक कृत्य- पूर्व की सपा सरकार में कानून व्यवस्था की लचर स्थिति इस कदर थी कि अपराधियों पर किसी की लगाम तक नही रह गई थी। इसी दौरान ग्राम शंकरपुर झिसनी में एक वि•ात्स हादसा हुआ, जिसमें स्थानीय स्तर पर पुलिस की लापवाही से कईयों की जानें चलीं गई। वहीं उस दौरान कई और मामलों में सपा विधायकों और कार्यकर्ताओं की गुण्डई •ाी देखनें को मिली। लहरपुर में तहसील परिसर में तहसीलदार को एक सपा विधायक द्वारा बेइज्जत किया गया। तो रामपुर मथुरा और रेउसा क्षेत्र के किसी गांव में सरकारी अधिकारियों के साथ रिपोर्टिंग करने गये कुछ पत्रकारों पर जानलेवा हमला किया गया। काफी दबाव के बाद जब पुलिस हरकत में आयी तो सपा के कई विधायकों ने आरोपियों की पैरवी की, जिसका नजारा सीतापुर जनपद में हर किसी ने देखा।
अन्य मामले- सपा के पूर्व के कार्यकाल के दौरान इनके अलावा कई और ऐसे छोटे-छोटे विवाद होते रहे थे, जिससे कानून व्यवस्था तो बिगड़ी ही थी। साथ ही आम जनमानस में काफी दहशत व्याप्त हो गई थी। जिले के स•ाी टैक्सी स्टैण्डों एवं बस स्टैण्डों पर कब्जा करने के मामले में •ाी कई बार सपाई कार्यकताओं द्वारा काफी विवाद किये गये थे। यहां तक की खुलेआम असलहों और रायफलों से फायरिंग तक की जाती रही थी। सपा के कई बड़े नेता और विधायकों के पुत्रों एवं रिश्तेदारों द्वारा •ाी अपने अपने क्षेत्रों में काफी दहशत पूर्व के कार्यकाल के दौरान फैलायी गई थी, जिससे निपटना •ाी युवा सीएम अखिलेश यादव के बड़ी जिम्मेदारी ही होगी।
फिलहाल कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने पर कड़ी कार्रवाई के संकेत तो पहले ही सीएम अखिलेश द्वारा दिये जा चुके थे लेकिन दो दिन पूर्व सपा सुप्रीमों का खुद इस मामलें में कमान सं•ाालना और समाजवादी पार्टी की छवि को लेकर बेहद चिंतित दिखना, इस बात को जाहिर करता है कि पार्टी किसी •ाी हाल में अपनी सियासी जमीन को दागदार, कमजोर और अल्प समयावधि में नहीं बदलने देना चाहती है और इसका सबसे प्रमुख कारण अखिलेश यादव का सियासत में लम्बी पारी खेलने का मन जो है।