Monday, 13 June 2011

जब जंगल बचेगा तभी तो मिलेगा पानी


देश में बढ़ने वाली जनसँख्या ने हर उस वस्तु की जरूरत बढाने पर जोर दे दिया, जिसकी वजह से आम आदमी कहीं न कहीं अपने आप को अभागा करार दे देता है........

जनसंख्या बढ़ी तो सरकारों ने खाद्दान की जरुरत को नजरअंदाज नहीं किया और तमाम योजनाये किसानो के लिए सुरु कर दी, जिसके परिणाम भी चौकाने वाले हुए और देश में खाद्दान का  मानो भण्डार सा लग गया. उत्तर दिशा से निकलने वाली प्रमुख नदियों की मेहरबानी देश के हर कोने पर बनी रही और सैकड़ों नहरों  को जोड़ते हुए नदियों ने अपना दायरा बढ़ा दिया लेकिन समय के बढ़ने के साथ साथ न ही सरकारों द्वारा और न ही किसी व्यक्ति द्वारा कोई  आवश्यक कदम उठाये गए जिससे जल के संचयन को बढाया जा सके और आने वाले समय में इससे होने वाली दिक्कतों को आसानी से हल किया जा सके. 

कहते है " जल ही जीवन है ", कहने में तो इन शब्दों का बेमोल अर्थ है लेकिन क्या हम उस कदम को उठा रहे है. जिससे इससे होने वाली त्रासदी से निपटा जा सके. हकीकत में अपने आप को ही ठग सा रहे है.

Thursday, 2 June 2011

रामदेव का तड़का सभी को लगा झटका

रामदेव का तड़का सभी को लगा झटका 

कैसा है आपका भविस्य क्या जानते है आप , नहीं ! 
अगर जानना चाहते है तो रामदेव के साथ लग जाए 
जी हाँ इस सच को नकारा नहीं जा सकता की रामदेव ने सभी को हिला दिया है , फिर चाहे पीअम हो या देश का कोई भी भ्रस्टाचारी.

रामदेव इसको कैसे समझ रहे है लेकिन और लोग इस बात को गले के नीचे नहीं उतार रहे है की आने वाले समय में उनकी राजगद्दी को ग्रहण लगने वाला है. 

हम सब इस अभियान से भले ही न जुड़े लेकिन ऐसी सोच को अवश्य विकसित करे