जिस तरह मायावती सरकार में ग्राम स•ााओं में चिन्हित किये गये कुछ गांवों में अम्बेडकर ग्राम विकास योजना के अर्न्तगत करोड़ों रुपया खर्च किया गया, कुछ उसी तरह प्रदेश के लग•ाग हर एक जिला मुख्यालय पर •ाी बसपाईयों ने वोटों की रोटियां सेंकनें में कोई कसर नही छोड़ी। हर एक जिला मुख्यालय पर शहरी क्षेत्रों में एक मोहल्ले जिसमें दलितों की संख्या सर्वाधिक रही और उस मोहल्ले में काफी बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य कराया गया। शहर के मोहल्लों में जिन अधिकारियों ने क•ाी न पहुंच कर न ही गलियों की सड़कों का निरीक्षण किया और न तो साफ सफाई एवं पेयजल की व्यवस्था पर कोई ध्यान दिया। वही अध्किारी शहरों अम्बेडकर मोहल्ले और मलिन बस्तियों में बेहद सजग रहे और हर निर्माण एवं विकास कार्य को काफी एहतिहातन कराया।
यदि सीधे तौर पर यह कहा जाये कि पूर्व के बसपा शासन यानी की हाथीराज में शहरों के अधिकांश मोहल्लों को दबाया गया, कुचला गया। यदि शहरों के किसी मोहल्ले में विकास हुआ तो अम्बेडकर मोहल्लों के रूप में चिन्हित मलिन बस्तियों के इलाकों में! यदि आंकड़ों पर गौर करें तो प्रदेश के कुल 58 जिलों में लग•ाग एक अरब पांच करोड़ का काम महज कुछ महिनों में कराया गया। लिहाजा बसपा सरकार नें दलितों को एकजुट करने में कोई कसर नही छोड़ी और विधानस•ाा चुनावों से पूर्व ही दिसम्बर 2011 माह तक जैसे तैसे मलिन बस्तियों में काम पूरा करा दिया गया। मा. श्री कांशीराम जी शहरी गरीब दलित बाहुल्य बस्ती समग्र विकास योजना के अर्न्तगत जो विकास कार्य कराये गये उनमें पेयजल एवं सीवर व्यवस्था, जल निकासी की व्यवस्था, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था, सम्पर्क मार्गों का निर्माण, सीसी रोड एवं दोनों ओर बंद नाली का निर्माण, विद्युतीकरण एवं स्ट्रीट लाइटें की व्यवस्था, प्राथमिक विद्यालय, गरीबों के लिये आवासीय सुविधा, सामुदायिक केन्द्रों का निर्माण, पार्कों का सौन्दर्यीकरण आदि योजनाआें का निर्माण कार्य कराया गया।
शासन द्वारा जारी किये गये शासनदेश से सिर्फ शहरों के अम्बेडकर मोहल्लों के रूप में चिन्हित इलाकों में निर्माण कार्य इस योजना के तहत हुआ तो अन्य मोहल्ले उपेक्षा का शिकार रहे। ऐसे में अन्य मोहल्लों में रहने वाले लोगों को खास तौर पर इस उपेक्षा का दंश झेलना पड़ रहा है, वहीं बसपा सरकार को इस करतब से अपनी पैठ और मजबूत होती दिखाई दी। बसपा शासन का ही यह दबाव था कि अम्बेडकर मोहल्लों में निर्माण कार्य को लेकर जिले के लग•ाग स•ाी वि•ाागों के अधिकारी बेहद चौकन्नें दिखाई दिये। आरईएस से लगाकर, डूडा तक व पालिका से लगाकर नलकूप तक हर एक वि•ााग का अधिकारी दिसम्बर माह के दौरान अम्बेडकर मोहल्ले का ही निरीक्षण करता दिखाई दिया। यदि सीतापुर शहर की बात की जाये तो 2011-12 की इस योजना के लिये जिले से शासन को शहर के अम्बेडकर मोहल्ले के लिये 2.83 करोड़ का बजट पास करके •ोजा था, जिस पर शासन द्वारा महज 2 करोड़ के कुल बजट पर ही मोहर लगायी गयी। जिसके अर्न्तगत कार्य •ाी काफी संतोष जनक नही हुआ है।