Sunday, 11 March 2012

साजिशों और उपद्रव के बीच फंसी सपा की साख


इसे साजिशों का परिणाम कहें या फिर फुल-फ्लैश में आयी सपा की सरकार से नशे में चूर सपाईयों का रसूख लेकिन इतना तो साफ है कि परिणाम आने के बाद चार दिनों के •ाीतर ही जिले में पांच ऐसे मामले हुये जिससे जनपद का लॉ-एण्ड-आॅर्डर सिस्टम पूरी तरह फेल हो गया। ज्यादातर जगह पर दलितों को निशाना बनाया गया तो विपक्षियों ने इसका ठीकरा समाजवादी पार्टी के समर्थकों पर फोड़नें में देरी नहीं की। लिहाजा जनता का केन्द्र बिन्दु बन चुकी सपा सरकार अब अपनी साख बचाने में लग गयी है।
पूरे प्रदेश में 6 मार्च को 2012 विधानस•ाा चुनाव के परिणाम आ गये और समाजवादी पार्टी की अन्दू्रहनी लहर के आगे अन्य स•ाी पार्टियां धराशायी हो गयीं। एक ओर जहां समाजवादी पार्टी द्वारा सत्ता में उनकी वापसी के बाद प्रदेश में अमन चैन रहने की बात को प्रमुखता से कहा गया, वहीं अन्य दलों ने एक बार फिर प्रदेश में गुण्डाराज होने की बात दोहरायी और कहीं न कहीं विपक्षियों की आशंकायें प्रदेश में सच साबित होती दिखाई दे रही हैं। ऐसे में यदि सीतापुर की बात करें तो परिणाम आने के अगले दिन यानी की सात मार्च से ही जिले में बवालों का दौर शुरू हो गया। एक बार तो लगा कि सीतापुर में अराजक तत्वों का बोलबाला हो गया है। 7 मार्च तकरीबन रात 9 बजे होली से ठीक एक दिन पूर्व जिले के रेउसा थाना क्षेत्र में दबंगों ने दलितों के कई छप्पर फूंक डाले। इस घटना में कई लोग बुरी तरह से जख्मी हो गये। काफी दबाव के बाद पुलिस ने दबंगों पर मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी की। इस मामले में सपा विधायक महेन्द्र सिंह झीनू बाबू के समर्थकों के जुड़े होने की बात प्रमुख रूप से आयी। रेउसा की इस घटना के बाद तो मानों घटनाओं की बाढ़ सी आ गयी।
अगले ही दिन मिश्रिख में चुनावी रंजिश के मद्देनजर दलित की हत्या कर दी गई। इस प्रकरण में सपा विधायक रामपाल राजवंशी के समर्थकों के जुड़े होने की खबरें आयीं। तो एक बार तो पुलिस प्रशासन हतप्र•ा दिखाई दिया। उधर संदना में सपा बसपा समर्थकों में काफी विवाद हुआ और •िाडंÞत हो गई।  काफी मशक्कत के बाद पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा, तब कहीं जाकर विवाद सुलझता हुआ दिखाई दिया। वहीं महोली में चुनावी रंजिश की एक और घटना सामने आयी। यहां सपा एवं बसपा के समर्थकों के बीच फायरिंग हुई। पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर एक की गिरफ्तारी •ाी की है। इसके अलावा शनिवार का दिन पूरा होते होते एक और घटना ने पूरे के पूरे सिस्टम को हिला सा रख दिया। इस दिन मिश्रिख में चुनावी रंजिश के कारण एक की हत्या किये जाने का कुत्सित प्रयास किया गया। यहां से मिल रही छबरों पर गौर करें तो इस घटना में •ाी सपा विधायक रामपाल राजवंशी के समर्थकों की पूरी •ाागीदारी रही है। कुल मिलाकर •ायमुक्त वातावरण का सपना दिखा रहे •ाावी युवा सीएम अखिलेश यादव के लिये जनपदों में शांति व्यवस्था बनाये रखने की एक बड़ी जिम्मेदारी पद पर बैठनें से पहले ही आ गयी है।

Friday, 9 March 2012

सत्ता की साइकिल पर सवार सपाई खरे उतरेंगे, एक बड़ा सवाल?


तमाम जानकारों और रणनीतिकारों की अटकलों पर विराम लगाते हुये जिले ही नही बल्कि प्रदेश की जनता ने समाजवादी पार्टी को प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता के मुहाने तक बैठा दिया है और अब अगले कुछ दिनों में कुछ औपचारिकताओं को पूरा कर नेताजी प्रदेश का सीएम पद•ाार चौथी बार सं•ाालेंगे। जाहिर है, ऐसे में जनता को अब बहुत सी उम्मीदें सपा सरकार से हैं और बात यदि सीतापुर कि की जाये तो जिले से विधानस•ाा पहुंचनें वाले सात सपा विधायकों से जिले के लोग अब जिले की तस्वीर बदलने की उम्मीद लगाने लगे हैं। पूर्व के कार्यकालों को पूरा करने वाले सपा विधायकों से लोग उम्मीद के साथ साथ उन पर एक सवाल •ाी करने लगे हैं कि क्या वह इस कार्यकाल में उनकी उम्मीदों पर खरा उतर सकेंगे?
दरअसल सीतापुर जिले को विकास की बेहद आवश्यक्ता है। जिस तरह अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी ने पार्टी के मैनीफेस्टो के हर एक बिन्दु का प्रचार अपने चुनावी अ•िायान में किया, उससे पार्टी की दोबारा पूर्ण बहुमत से सत्ता में वापसी होने से जिम्मेदारी बढ़ गयी है। बेरोजगारी •ात्ते से लेकर कन्या विद्या धन दिये जाने की बात हो या फिर गम्•ाीर बीमारियां जिसमें लीवर, कैंसर, किडनी आदि आते हैं का मुफ्त इलाज होने का दावा करने वाली समाजवादी पार्टी को गरीबों के हितों के लिये कई ऐसे काम और करने होंगे जिससे वह अब तक की सरकारों से महरूम रहे हैं। अखिलेश यादव द्वारा शुरू की गई रथ यात्रा जब सीतापुर पहुंची तो इस दौरान सीतापुर में बंद चीनी मिलों को शुरू कराने और बुनकरों के लिये विशेष योजनायें लागू किये जाने की बात पुरजोर तरह से उनके द्वारा कही गयी। साथ ही अखिलेश ने मीटिंगों के दौरान बेरोगारों के लिये रोजगार उपलब्ध कराये जाने की बात •ाी कही। जनसंदेश टाइम्स पहले •ाी कई बड़े मुद्दे उठा चुका है, जिसमें शहर के अन्दर वर्षों से लंबित एक पुल, लड़कियों के लिये पुराने सीतापुर में एक डिग्री कॉलेज, चिकित्सीय व्यवस्था में वृहद स्तर पर सुधार किये जाने की बात को प्रमुख रूप दिया गया था। इसी तरह गांजरी इलाकों में बाढ़ की बड़ी समस्या से निपटने के लिये •ाी सपा सरकार को कारगर उपाय करने होगे, जिससे लाखों प्र•ाावित लोगों को राहत मिल सके।
लेकिन एक बात से •ाी इंकार किया जाना मुश्किल है कि जिले में पूर्व से रहे सपा के कई विधायकों में काम के नाम पर कोई विशेष कार्य नही किये हैं। उनके क्षेत्रों में आज •ाी लोगों को मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। फिर चाहे शिक्षा की समस्या हो या, विकास की दरकार और या फिर रोजगार के साधन पूर्व की बसपा सरकार पर ठीकरा फोड़नें वाले सपा विधायकों को अपने इस कार्यकाल में अग्निपरीक्षा से गुजरना होगा, शायद त•ाी प्रदेश के युवा हीरो अखिलेश यादव द्वारा देखा गया नये समाजवाद का सपना पूरा हो सकेगा। गौरतलब है कि नये समाजवाद में अखिलेश ने जिस सपनें को देखा है, उसमें विकास युक्त, •ायमुक्त और अपराध मुक्त शासन की परिकल्पा प्रमुख रूप से है।

Saturday, 3 March 2012

.... तो इन पर मेहरबानी आखिर क्यों नहीं सफेदपोश की?


 सीतापुर। जी हाँ, तो सफेदपोशों की नजरें इन लाचारों पर अब तक मेहरबान क्यों नहीं हुर्इं? वर्षों से लहरपुर कस्बे के प्रमुख इलाके में रह रहे मंगता विरादरी के लोग आज •ाी अपने आशियाने की मुक्कमल जगह तलाश रहे हैं। इन लाचारों की आंखों में बेबसी के आंसू तो कोई पोछना वाला नही है, बल्कि लोगों की ओर से, खासकर सफेदपोशों की ओर से •ाी क•ाी कोई ऐसा कदम नही उठाया गया जिससे कि इस विरादरी के चंद लोगों को दो वक्त की रोटी सुकून से मिल सके। जाहिर है वोट बैंक की राजनीति यहां •ाी दिखाई दी और इस विरादरी के चंद लोगों की मौजूदगी की वजह से ही किसी •ाी राजनेता ने क•ाी •ाी इनको लेकर प्रदेश की संवैधानिक धरती पर कोई मुद्दा नही उठाया।
लहरपुर कस्बे में पिछले 50 वर्षों से पुराने थाने की जमीन पर अपना फौरी तौर पर आशियाना बनाकर रह रहे मंगता जनजाति के लग•ाग दो सैकड़ा लोगों का काम या तो •ाीख मांगना है और या फिर •ौसों का इलाज ठेके पर करना है। इनमें से कुछ लोग बाहर जाकर काम •ाी करते हैं तथा महिलायें ठेके पर घास काट कर अपने परिवार का पेट पालती हैं। कस्बे के बीच रह रहे लोगों को कई बार लोगों से यहां से खदेड़नें की •ाी नापाक कोशिशें की लेकिन दो सैकड़ा गरीब लोगों की एकजुटता के आगे क•ाी कोई अपने इरादों में सफल न हो सका। एक बार फिर राजनीति यहां पर होती दिखाई दी लेकिन गरीबों और लाचारों के पक्ष में नही अपितु सरकारी अलंबरदारों के पक्ष में! कारण साफ है, इस जनजाति के लोगों के पास वोट बैंक की काफी कमी है तो इनकी मदद करें तो कौन? यहीं नहीं प्रशासन ने कई बार इनकों हटाने पर विचार किया लेकिन सत्ताई शेरों का समर्थन न मिलने से आलाहाकिमों के इरादें परवान न चढ़ सके। तो क्या माना जाये कि क्या इस बार अंदरखानें में सबकुछ सेट हो गया था? इसलिये ही सरकारी मशीनरी की जेसीबी मशीन का विरोध किसी •ाी सफेदपोश ने नही किया।
खैर यदि इन लाचारों को यदि सरकारी जमीन से बेदखल ही करना था तो उनको पहले से रहने का बंदोबस्त क्यों नही दिया गया? यह सवाल सीधे तौर पर सरकारी अलंबरदारों से है कि आशियाना उजाड़ते वक्त इन गरीबों के बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा के बारें में क्यों नही सोचा गया? जाहिर है मौजूदा समय में सत्ता किसी राजनीतिक दल के हाथ नही है, तो खुला खेल फर्रूखाबादी ही खेला जायेगा। सूबे की माया सरकार द्वारा जिले में तैनात किये गये अफसरों को पिछले पांच वर्षों में यहीं पाठ पढ़ाया गया कि गरीबों को आशियाना कैसे दिया जाये? दलितों को सम्मान कैसे दिलाया जाये? दबे कुचलों को जीने का अधिकार कैसे सिखाया जाये? अफसरों ने पिछले वर्षों में बहुत कुछ सीखा, तो अब कैसे यह पाठ •ाूल गये? लहरपुर प्रशासन द्वारा इस विरादरी के लोगों के लिये काफी प्रयास तो किये जा रहे हैं और इसके लिये कई गांव जैसे कि •ावानीपुर, लच्छननगर के अलावा लहरपुर से हरगांव रोड पर राजा साहब की कोठी के पास जगह •ाी चिन्हित की गयी लेकिन वर्षों से कस्बे में रहे रहे इन लोगों को आस पास के इलाके रास नही आ रहे। जिसका प्रमुख कारण बेराजेगारी की कमी और दो वक्त की रोटी का इंतजाम करने की •ाारी जद्दोजहद है। प्रशासन आशियाने के लिये जगह तो तलाश कर रहा है और करता सकता •ाी है लेकिन रोजी एवं रोटी का इंतजामात कैसे करेगा? बेहद संजीदा और यक्ष प्रश्न यहीं बना हुआ है?
नया बवेला खड़ा करने में लगे लहरपुर के लेखपाल
सीतापुर। बहती गंगा में सब कोई हाथ धोने की कोशिश करता है तो इस बेहद गम्•ाीर प्रकरण को लेकर लहरपुर के कुछ लेखपाल कैसे ला•ा पाने में लगे हैं? आइये जानते हैं। दरअसल मंगता विरादरी के लोगों को जिस दिन से पुलिस प्रशासन ने पुराने थाने की जमीन से हटाया है, उसी दिन से कुछ लो•ाी लेखपालों ने अपनी दुकानें खोलनी शुरू कर दी हैं। लेखपाल खुलेआम तो नही लेकिन दबीं जुबां में विरादरी के लोगों से यह बात कहने में कोई गुरेज नही कर रहे कि आप लोग आस पास की अन्य जमीनों में टिकासन डाल लें। वहीं दूसरी ओर इन जमीनों के मालिकों को यह डर दिखा रहे कि यदि उनको कुछ फायदा नही दिया गया तो वह विरादरी के लोगों को वहीं टिका देंगे। सूत्रों की मानें तो वहीं लेखपालों द्वारा पुलिस अधिकारियों को •ाी फर्जी तौर यह बताया जा रहा कि आस पास की जमीनों पर •ाी पुराने थाने का ही हक है, जिससे की उक्त •ाूमि के स्वामियों से फायदा प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से पाया जा सके।

Saturday, 2 July 2011

बदलाव की नयी परिभाषा



इस अतीत की सुन्दरता को क्यूँ भूल गए हो, क्या आने वाला भविष्य इसी बात का है. मैंने सोचा तुमसे ये बात पूछूं की क्या दिन बदलने पर तस्वीर में यही बदलाव आता है बदलते मौसम, दिन, पल, जीवन, संस्कृति, कला, लोगो का नजरिया हर उस चीज पर क्यों बदलाव हा रहा है.इस बदलते परिद्रश्य में क्यूँ बदलाव हो रहा है. कहते है गया समय नहीं आता तो क्या हम उस गये समय को ही याद कर अतीत की धारा में गोते लगाते रहेंगे, बदलाव के इस दौर में क्या आने वाले समय को अपने नजरिये से नहीं देख सकते 

हम देखंगे क्यूँ की बदलाव ने कुछ नयी परिभासाये लिखी है हमे भी लिखना है. 

Monday, 13 June 2011

जब जंगल बचेगा तभी तो मिलेगा पानी


देश में बढ़ने वाली जनसँख्या ने हर उस वस्तु की जरूरत बढाने पर जोर दे दिया, जिसकी वजह से आम आदमी कहीं न कहीं अपने आप को अभागा करार दे देता है........

जनसंख्या बढ़ी तो सरकारों ने खाद्दान की जरुरत को नजरअंदाज नहीं किया और तमाम योजनाये किसानो के लिए सुरु कर दी, जिसके परिणाम भी चौकाने वाले हुए और देश में खाद्दान का  मानो भण्डार सा लग गया. उत्तर दिशा से निकलने वाली प्रमुख नदियों की मेहरबानी देश के हर कोने पर बनी रही और सैकड़ों नहरों  को जोड़ते हुए नदियों ने अपना दायरा बढ़ा दिया लेकिन समय के बढ़ने के साथ साथ न ही सरकारों द्वारा और न ही किसी व्यक्ति द्वारा कोई  आवश्यक कदम उठाये गए जिससे जल के संचयन को बढाया जा सके और आने वाले समय में इससे होने वाली दिक्कतों को आसानी से हल किया जा सके. 

कहते है " जल ही जीवन है ", कहने में तो इन शब्दों का बेमोल अर्थ है लेकिन क्या हम उस कदम को उठा रहे है. जिससे इससे होने वाली त्रासदी से निपटा जा सके. हकीकत में अपने आप को ही ठग सा रहे है.

Thursday, 2 June 2011

रामदेव का तड़का सभी को लगा झटका

रामदेव का तड़का सभी को लगा झटका 

कैसा है आपका भविस्य क्या जानते है आप , नहीं ! 
अगर जानना चाहते है तो रामदेव के साथ लग जाए 
जी हाँ इस सच को नकारा नहीं जा सकता की रामदेव ने सभी को हिला दिया है , फिर चाहे पीअम हो या देश का कोई भी भ्रस्टाचारी.

रामदेव इसको कैसे समझ रहे है लेकिन और लोग इस बात को गले के नीचे नहीं उतार रहे है की आने वाले समय में उनकी राजगद्दी को ग्रहण लगने वाला है. 

हम सब इस अभियान से भले ही न जुड़े लेकिन ऐसी सोच को अवश्य विकसित करे 


Saturday, 21 May 2011

badla, gusse ke ant par nkaratmak tippdi

बदले के खेल में कोई हारा कोई जीता. गुस्से ने ऐसी इन्तहा कर दी की होने लगी नकारात्मक टिप्पड़ी 

क्यूँ लोग इस बात को भूल जाते है की अचानक आया हुआ गुस्सा एक ऐसे तूफ़ान की तरह होता है जिसमे सब कुछ मिटाने की तो छमता होती है लेकिन कुछ भी नया बनाने का साहस नहीं होता है.क्यूंकि  इस अचानक आये तूफान में   बहुत कुछ एक पल में इस कदर बिखर जाता है की उसको दोबारा एक कसती में लाना बेहद कठिन होता है .

इस ब्लॉग को पढ़ कर क्या करना होगा ये हर कोई सायद समझ सकता hai