Saturday, 2 July 2011

बदलाव की नयी परिभाषा



इस अतीत की सुन्दरता को क्यूँ भूल गए हो, क्या आने वाला भविष्य इसी बात का है. मैंने सोचा तुमसे ये बात पूछूं की क्या दिन बदलने पर तस्वीर में यही बदलाव आता है बदलते मौसम, दिन, पल, जीवन, संस्कृति, कला, लोगो का नजरिया हर उस चीज पर क्यों बदलाव हा रहा है.इस बदलते परिद्रश्य में क्यूँ बदलाव हो रहा है. कहते है गया समय नहीं आता तो क्या हम उस गये समय को ही याद कर अतीत की धारा में गोते लगाते रहेंगे, बदलाव के इस दौर में क्या आने वाले समय को अपने नजरिये से नहीं देख सकते 

हम देखंगे क्यूँ की बदलाव ने कुछ नयी परिभासाये लिखी है हमे भी लिखना है. 

Monday, 13 June 2011

जब जंगल बचेगा तभी तो मिलेगा पानी


देश में बढ़ने वाली जनसँख्या ने हर उस वस्तु की जरूरत बढाने पर जोर दे दिया, जिसकी वजह से आम आदमी कहीं न कहीं अपने आप को अभागा करार दे देता है........

जनसंख्या बढ़ी तो सरकारों ने खाद्दान की जरुरत को नजरअंदाज नहीं किया और तमाम योजनाये किसानो के लिए सुरु कर दी, जिसके परिणाम भी चौकाने वाले हुए और देश में खाद्दान का  मानो भण्डार सा लग गया. उत्तर दिशा से निकलने वाली प्रमुख नदियों की मेहरबानी देश के हर कोने पर बनी रही और सैकड़ों नहरों  को जोड़ते हुए नदियों ने अपना दायरा बढ़ा दिया लेकिन समय के बढ़ने के साथ साथ न ही सरकारों द्वारा और न ही किसी व्यक्ति द्वारा कोई  आवश्यक कदम उठाये गए जिससे जल के संचयन को बढाया जा सके और आने वाले समय में इससे होने वाली दिक्कतों को आसानी से हल किया जा सके. 

कहते है " जल ही जीवन है ", कहने में तो इन शब्दों का बेमोल अर्थ है लेकिन क्या हम उस कदम को उठा रहे है. जिससे इससे होने वाली त्रासदी से निपटा जा सके. हकीकत में अपने आप को ही ठग सा रहे है.

Thursday, 2 June 2011

रामदेव का तड़का सभी को लगा झटका

रामदेव का तड़का सभी को लगा झटका 

कैसा है आपका भविस्य क्या जानते है आप , नहीं ! 
अगर जानना चाहते है तो रामदेव के साथ लग जाए 
जी हाँ इस सच को नकारा नहीं जा सकता की रामदेव ने सभी को हिला दिया है , फिर चाहे पीअम हो या देश का कोई भी भ्रस्टाचारी.

रामदेव इसको कैसे समझ रहे है लेकिन और लोग इस बात को गले के नीचे नहीं उतार रहे है की आने वाले समय में उनकी राजगद्दी को ग्रहण लगने वाला है. 

हम सब इस अभियान से भले ही न जुड़े लेकिन ऐसी सोच को अवश्य विकसित करे 


Saturday, 21 May 2011

badla, gusse ke ant par nkaratmak tippdi

बदले के खेल में कोई हारा कोई जीता. गुस्से ने ऐसी इन्तहा कर दी की होने लगी नकारात्मक टिप्पड़ी 

क्यूँ लोग इस बात को भूल जाते है की अचानक आया हुआ गुस्सा एक ऐसे तूफ़ान की तरह होता है जिसमे सब कुछ मिटाने की तो छमता होती है लेकिन कुछ भी नया बनाने का साहस नहीं होता है.क्यूंकि  इस अचानक आये तूफान में   बहुत कुछ एक पल में इस कदर बिखर जाता है की उसको दोबारा एक कसती में लाना बेहद कठिन होता है .

इस ब्लॉग को पढ़ कर क्या करना होगा ये हर कोई सायद समझ सकता hai

Wednesday, 11 May 2011

samay ko kisne dekha, aaiye jante hai

समय की विधा किसने देखी, आइये कोसिस करते है जानने की..........

किसी अनंत कल के आगे जाकर समय को जानने की कोसिस एक ऐसी विधा है जिसको हर कोई समझ तो सकता है लेकिन उस परिद्रश्य को पहचानने की समझ उसी में है जिसने अनादी काल को जाना है. यानि हम उस सोच को क्यूँ नहीं विकसित करते जिससे अनादी काल को आत्मसात किया जा सके.

सच में विडंबना यही है की इंसान सोच को उस दायरे तक नहीं ले जाना चाहता जिससे की वह प्रथ्वी से लेकर आकास के भीतर अन्खोजा रहस्य जान सके. इस बात को आज ही आत्मसात करे और अपने जीवन में नयी उन्माद को इस्थापित करे.


मै हिमांशु हूँ, क्या आप मुझसे जुड़ेंगे 

i am in mumbai


HAR SUBAH EK NYA AAYAM LEKAR AATI HAI.......................



रोजाना एक बात मेरे मन में आती है की लोग हर सुबह ये बात क्यूँ कहते है की लो आज फिर वही करना है जो हम रोज करते है.

क्यूँ आप बताएँगे

मै जानता  हूँ  की दिन वही रोज एक जैसा ही होता है लेकिन हर सुबह एक नया आयाम लेकर आती है, तो क्यूँ न हम अभी से इस नए आयाम को खोज कर सार्थक सुरुवात कर दे.................

मै हिमांशु हूँ, क्या आप मुझसे जुड़ना चाहेंगे