समय की विधा किसने देखी, आइये कोसिस करते है जानने की..........
किसी अनंत कल के आगे जाकर समय को जानने की कोसिस एक ऐसी विधा है जिसको हर कोई समझ तो सकता है लेकिन उस परिद्रश्य को पहचानने की समझ उसी में है जिसने अनादी काल को जाना है. यानि हम उस सोच को क्यूँ नहीं विकसित करते जिससे अनादी काल को आत्मसात किया जा सके.
सच में विडंबना यही है की इंसान सोच को उस दायरे तक नहीं ले जाना चाहता जिससे की वह प्रथ्वी से लेकर आकास के भीतर अन्खोजा रहस्य जान सके. इस बात को आज ही आत्मसात करे और अपने जीवन में नयी उन्माद को इस्थापित करे.
मै हिमांशु हूँ, क्या आप मुझसे जुड़ेंगे
achchha hai Himanshu. aap ne pichhale ravivar ko mera sampadakeey samay ka sach padha ya nahee?
ReplyDeletenice ...very true..well said
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